अशोक झा/ नोएडा:
यूपी एटीएस ने नोएडा से दो संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया। यह ISI और पाकिस्तानी गैंगस्टर्स के संपर्क में थे। दोनों पर टारगेट किलिंग और स्लीपर सेल बनाने की साजिश का आरोप है। उनके पास से हथियार बरामद हुए हैं। मामले में यूएपीए सहित कई धाराओं में केस दर्ज कर जांच जारी है। उत्तर प्रदेश एटीएस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा से दो संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार चौहान उर्फ हिज्बुल्ला अली खान निवासी बागपत मेरठ और समीर खान निवासी सीमापुरी दिल्ली के रूप में हुई है
एटीएस के अनुसार दोनों आरोपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर काम कर रहे थे और पाकिस्तानी गैंगस्टर्स व आतंकी नेटवर्क के संपर्क में थे। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तान के गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट के संपर्क में आए थे. इनके जरिए भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर स्लीपर सेल तैयार करने की साजिश रची जा रही थी। गूगल लोकेशन और QR पेमेंट से चल रहा था आतंकी खेल।समीर को दीवारों पर “तहरीके तालिबान हिंदुस्तान” लिखने और अन्य लोगों को जोड़ने का टास्क दिया गया था. तुषार उर्फ हिज्बुल्लाह अली खान इंस्टाग्राम के जरिए समीर से जुड़ा था. दोनों पाकिस्तानी गैंगस्टर के इशारे पर दिए गए टारगेट की रेकी करने और वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार थे. दोनों कॉन्फ्रेंस कॉल पर पाकिस्तानी हैंडलर से भी जुड़े रहते थे. सोशल मीडिया और कुछ अन्य लोगों के बहकावे में आकर तुषार का झुकाव इस्लाम के प्रति बढ़ गया. तुषार इस्लामी परंपराओं का पालन भी करने लगा. इंस्टाग्राम के जरिए शहजाद भट्टी और आबिद जट से तुषार जुड़ा था. बाद में वॉइस, वीडियो और पुश टू टॉक कॉलिंग से भी पाकिस्तानी गैंगस्टर से जुड़ा। यूपी ATS ने मांगी मदरसों की डिटेल
दिल्ली ब्लास्ट में पांचवें
एटीएस के मुताबिक आरोपियों को संवेदनशील स्थानों की रेकी करने, टारगेट तय करने और देश में अशांति फैलाने के लिए उकसाया गया था. तुषार चौहान को टारगेट किलिंग के लिए करीब 3 लाख रुपए का लालच दिया गया था. आरोप है कि दोनों आरोपी हैंड ग्रेनेड और पिस्टल के जरिए हमले की तैयारी कर रहे थे और उत्तर प्रदेश के कई चर्चित लोगों को निशाना बनाने की योजना थी।गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस और एक चाकू बरामद किया गया है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि उन्हें हमले के बदले पैसे और विदेश भेजने का लालच दिया गया था। समीर खान को तहरीक ए तालिबान हिंदुस्तान से जुड़े प्रचार का काम सौंपा गया था. उसे दीवारों पर संगठन के नाम लिखने और लोगों को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी।एटीएस ने यह भी बताया कि दोनों आरोपी पिछले कुछ महीनों में कई लोगों को जान से मारने की धमकी दे चुके थे। धमकी देने के दौरान फोन पर कॉन्फ्रेंस कॉल में पाकिस्तानी हैंडलर भी जुड़े होते थे इससे साफ है कि पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था।









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