
सीमांचल से अशोक झा: पूर्वोत्तर में विकास का सूर्योदय हो रहा है। मणिपुर, असम, मेघालय के बाद कोलकाता होकर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्णिया पहुंचेंगे। पूर्णिया की सरजमी से बिहार के विकास के लिए 40000 करोड़ की सौगात देंगे। पूर्णिया से बिहार को 40 हजार करोड़ की योजनाओं की सौगात देंगे प्रधानमंत्री मोदी
पूर्णिया एयरपोर्ट को मिलेगा नया टर्मिनल, पहली वाणिज्यिक उड़ान की शुरुआत होगी। सीमांचल के लोगों को देश के अन्य हिस्सों तक तेज और सुगम यात्रा की सुविधा मिलेगी
जोगबनी से वंदे भारत एक्सप्रेस, सहरसा से अमृत भारत एक्सप्रेस और जोगबनी-ईरोड अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन
भागलपुर के पीरपैंती में 3×800 मेगावाट की थर्मल पावर परियोजना और कोसी-मेची लिंक परियोजना का शिलान्यास
पीएम आवास योजना के 40920 लाभार्थियों को गृह प्रवेश का तोहफा पीएम मोदी के हाथों मिलेगा। इस अवसर पर पीएम मोदी पूर्णिया हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। दरअसल पीएम मोदी आज पूर्णिया पहुंच रहे हैं. यहां वे पोर्टा केबिन के तहत करीब 46 करोड़ की लागत से बने पूर्णिया एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे. इसके साथ ही पूर्णिया सहित कोसी-सीमांचल व आस पास के दर्जन से अधिक जिले के लोगों को हवाई सेवा का लाभ मिलेगा. एयरपोर्ट उद्घाटन के पश्चात पीएम मोदी गुलाबबाग जीरो माइल के समीप शीशाबाड़ी स्थित एसएसबी कैंप में एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित करेंगे और 6580 करोड़ की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के साथ साथ 45 हजार करोड़ की विभिन्न स्थानीय योजनाओं का भी शिलान्यास व उद्घाटन करेंगे।
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी: पीएम मोदी जोगबनी-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे। वे आज दोपहर 2.20 बजे पूर्णिया एयरपोर्ट पर आइएएफ बीबीजे विमान से उतरेंगे और वहां टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वे हेलीकाप्टर से 3.15 बजे सिकंदर पुर में बने हेलीपैड पर उतरेंगे। वहां 4.45 बजे तक योजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन और सभा को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी यहां से हेलीकाप्टर से पीएम मोदी फिर एयरपोर्ट आएंगे, जहां से विमान से 5.20 बजे दिल्ली के लिए उड़ेंगे। विकास परियोजनाओं की सौगात:
अपने 11 साल के कार्यकाल में, पीएम मोदी ने बिहार को लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की सौगात दी है. आज एक और तोहफा होगा. राज्य डबल इंजन वाली सरकार का लाभ उठा रहा है, वरिष्ठ बीजेपी नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, जिन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की तैयारियों का जायजा लेने पूर्णिया का दौरा किया था। पीएम मोदी के दौरे को लेकर सुरक्षा कड़ी: राज्य में अगले कुछ हफ़्तों में चुनावों की घोषणा होने की संभावना है. प्रधानमंत्री के दौरे के लिए पूर्णिया में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं, जिसमें रविवार आधी रात से 24 घंटे के लिए राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दिया गया है। दूसरी ओर सत्तासीन एनडीए गठबंधन एक-एक कर आपने वादों को पूरा करने में जुटी है। पीएम मोदी सोमवार को बिहार में चौथे एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही पीएम मोदी कई अन्य विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। पीएम मोदी के इस दौरे से सीमांचल के विकास को नई रफ्तार तो मिलेगी ही साथ ही राज्य के सत्ता की चाभी रखने वाले सीमांचल में एनडीए भी मजबूत होगी। पीएम मोदी के इसे दौरे के सियासी मायने क्या हैं, आइए समझते हैं, आंकड़ों और पिछले चुनावी नतीजों के आधार पर।ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी का विकास योजनाओं का यह सियासी सौगात सीमांचल में सर्जिकल स्ट्राइक साबित हो पाता है या नहीं। कांग्रेस नेता कुमार आदित्य कहते हैं ‘ सीमांचल की जनता इन चेहरों को बखूबी पहचानती है। चुनाव आया है तो ये विकास योजनाओं का पिटारा खोल रहे हैं। यह केवल छलावा है। लोकसभा चुनाव 2024 में सीमांचल की 4 में से 3 सीटों पर एनडीए को हार का सामना करना पड़ा था विधानसभा चुनाव 2020 में भी एनडीए यहां की 24 में से मात्र 9 सीटें जीत सकी थी। सीमांचल में दमदार उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है भाजपा : कहावत है कि सियासत से जुड़े लोगों के हर कदम के राजनीतिक मायने होते हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे के राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव दस्तक दे रहा है, ऐसे में राजनीतिक नफा-नुकसान की चर्चा स्वाभाविक है। सीमांचल में लोकसभा की 4 तो विधानसभा की 24 सीटें: सीमांचल का इलाका राजनीतिक रूप से अतिसंवेदनशील भी माना जाता है, जिसे चिकेन नेक भी कहा जाता है। यहां कुल 24 विधानसभा सीट है। विगत 2020 विधानसभा चुनाव में यहां महा गठबन्धन को 10, एनडीए को 9 और AIMIM 5 सीटें हासिल हुई थी। यहां की खासियत है कि यहां के लोगों ने समय-समय पर हर दल को मौका दिया है जिसमें भाजपा भी शामिल रहा है।
2024 के आम चुनाव में एनडीए को 3 सीटों पर मिली थी हार: लेकिन, भाजपा को इस बात का मलाल रहा है कि इस इलाके में उसकी महत्वपूर्ण भागीदारी हाल के चुनावों में स्थापित नहीं हो पाई है। बीते लोकसभा चुनाव में भी इलाके के 4 लोकसभा चुनाव क्षेत्र में केवल अररिया भाजपा के खाते में गई जबकि कटिहार और अररिया कांग्रेस के खाते में गई। पूर्णिया सीट पर निर्दलीय राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने जीत दर्ज किया। 2019 में सीमांचल की तीन सीटों पर जीती थी एनडीए जबकि, वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कटिहार, पूर्णिया और अररिया सीट पर एनडीए को जीत हासिल हुई थी. ऐसे में विकास योजनाओं की घोषणा के माध्यम नरेन्द्र मोदी की कोशिश होगी कि वे अधिक से अधिक मतदाताओं को साध सके ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में फिर से एक बार सीमांचल के इलाके में स्थापित होने का मौका मिल सके।
भाजपा जानती है कि मुस्लिम वोट बैंक उसके पक्ष में आसानी से नहीं आएगा। इसलिए वह दलितों, अति पिछड़े वर्गों (EBC) और प्रवासी मजदूरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का गृह जिला किशनगंज है, जिससे पार्टी इस इलाके में विशेष मेहनत कर रही है। जेडीयू भी इस रणनीति का हिस्सा है और एनडीए मिलकर सीमांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
मोदी की रैली से बढ़ी हलचल, जारी हो सकता है चुनावी अधिसूचना: 15 सितंबर को पूर्णिया में मोदी की रैली चुनावी अधिसूचना जारी होने से पहले की आखिरी बड़ी सभा मानी जा रही है। माना जा रहा है कि यहीं से एनडीए चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करेगा। दरभंगा की सभा में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के तीखे हमलों के जवाब की उम्मीद भी इसी मंच से की जा रही है। यही वजह है कि इस रैली पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।
विपक्ष का पलटवार: महागठबंधन इस दौरे को “चुनावी गिफ्ट” बताकर हमला कर रहा है। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने बिहार को हमेशा नजरअंदाज किया और अब चुनावी फायदे के लिए प्रोजेक्ट्स का एलान कर रही है। कांग्रेस और आरजेडी इस इलाके में मुस्लिम मतदाताओं के सहारे अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सीमांचल का राजनीतिक माहौल और भी दिलचस्प होता जा रहा है।
क्यों खास है सीमांचल? कैसे बदल रहा यहां का चुनावी समीकरण?: सीमांचल का महत्व सिर्फ जातीय समीकरण तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र भौगोलिक और आर्थिक रूप से भी अहम है। नेपाल और बंगाल की सीमा से सटा यह इलाका रणनीतिक तौर पर संवेदनशील माना जाता है। साथ ही, प्रवासी मजदूरों और युवाओं की बड़ी संख्या होने के कारण यहां रोजगार और विकास के मुद्दे चुनाव को निर्णायक बना सकते हैं।
चुनावी जोर-आजमाइश का केंद्र-बिंदू होगा सीमांचल
इस आम सभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का भी इस इलाके में अपना जनाधार है. इस सभा के जरिये एनडीए अपनी एकजुटता का संदेश मतदाताओं तक पहुंचाना चाहेगा। गहन वोटर पुनरीक्षण (SIR) और वक्फ बिल को लेकर सीमांचल के अल्पसंख्यकों में उहापोह की स्थिति है। क्योंकि यहां AIMIM अपनी पैठ बनाने में कामयाब रहा है और बीते विधानसभा चुनाव में अपनी सियासी ताकत का इजहार कर चुका है।
पिछले साल सीमांचल ने ही तोड़ा था तेजस्वी का सपना
जबकि, महा गठबन्धन भी सीमांचल में इस बार कोई गलती नहीं करना चाहेगा, क्योंकि गत विधानसभा चुनाव में सीमांचल की वजह से ही महागठबन्धन महज 12 हजार वोटों के अंतर से सरकार बनाने से और तेजस्वी मुख्यमंत्री बनने से दो कदम दूर रह गए थे.
AIMIM ने काटे वोट, मात्र 12 हजार से अंतर से चूके तेजस्वी: दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में महागठबंधन को एनडीए से मात्र 12 हजार वोट कम मिले थे। सियासी जानकारों का मानना है कि पिछले चुनाव में सीमांचल में AIMIM ने जो 5 सीटें जीती, उसने महागठबंधन का नुकसान ही किया. यदि ओवैसी की पार्टी को मिले वोट और सीटें तेजस्वी को मिल जाती तो संभव है कि सरकार महागठबंधन की बनती।








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