
– सीमांचल तय करेगा कौन बैठेगा पांच साल सत्ता के कुर्सी पर
– दिल्ली में विस्फोट की घटना के बाद बढ़ाई गई और सतर्कता
बिहार चुनाव से अशोक झा: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान मंगलवार, 11 नवंबर को शुरू हो गया है। दूसरे चरण में कुल 45,399 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 40,073 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं. कई दलबदलू उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं- जैसे मोहानिया की विधायक संगीता कुमारी (अब भाजपा से), नवादा की विभा देवी (अब जेडीयू से) और पूर्व मंत्री मुरारी गौतम, जो इस बार लोजपा (रामविलास) से मैदान में हैं। 7.69 लाख युवा मतदाता: 3.7 करोड़ मतदाताओं में 1.75 करोड़ महिलाएं शामिल हैं. 18-19 वर्ष आयु वर्ग के नए मतदाताओं की संख्या 7.69 लाख है. नवादा जिले की हिसुआ सीट में सबसे अधिक 3.67 लाख मतदाता हैं, जबकि लौरिया, चनपटिया, रक्सौल, त्रिवेणीगंज, सुगौली और बनमखी सीटों पर सबसे अधिक 22-22 प्रत्याशी मैदान में हैं। करीब एक महीने तक चले चुनाव प्रचार के बाद अब मतदान की अंतिम घड़ी आ गई है। दूसरे चरण में 18 जिलों की 122 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इन सीटों पर कुल 1302 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है। राज्यभर में वोटिंग के लिए 45,399 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।पहले चरण में 121 सीटों पर 65% से अधिक मतदान हुआ था, जिसे अब तक का सबसे अधिक बताया गया है। दूसरे चरण के लिए मैदान में पूर्व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद (कटिहार), पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी (सिकंदरा), और कई पूर्व मंत्री जैसे विनय बिहारी (लौरिया), नारायण प्रसाद (नौतन), शमीम अहमद (नरकटिया), राणा रणधीर सिंह (मधुबन), प्रमोद कुमार (मोतिहारी), और सुनील कुमार पिंटू (सीतामढ़ी) हैं। सीमांचल के किशनगंज जिले में कुल चार विधानसभा 52 बहादुरगंज, 53 ठाकुरगंज, 54 किशनगंज और 55 कोचाधामन में दूसरे चरण का मतदान आज ही रहा है। किशनगंज व ठाकुरगंज विधानसभा सीट से 10-10 प्रत्याशी जबकि बहादुरगंज विधानसभा से 9 प्रत्याशी और कोचाधामन विधानसभा से 6 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद होगा। जिला प्रशासन के द्वारा चारों विधानसभा क्षेत्र में मतदान को लेकर 1366 मतदान केन्द्र बनाये गये हैं। वहीं सभी मतदान केंद्र पर पोलिंग एजेंट के प्रतिनिधि की मौजूदगी में सुबह 5:30 बजे माक पोल कराकर ईवीएम को चेक कर लिया जाएगा। किशनगंज किशनगंज जिले में कुल मतदाताओं की संख्या – 11,25,959, पुरुष मतदाता 6,00,253, महिला मतदाता – 5,25,670, अन्य मतदाता 3618 से 19 वर्ष के कुल वोटर 26,359, 85 वर्ष से अधिक आयु के कुल वोटर – 6, 117
दिव्यांग वोटर – 12,262कुल मतदान केंद्र- 1366 किशनगंज में 343 संवेदनशील मतदान केंद्र चिन्हित किए गए है। किशनगंज जिले में कुल 6930 मतदान कर्मी चुनाव ड्यूटी में है शामिल।आज सुबह सात बजे से मतदान होगा। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण माहौल में चुनाव सम्पन्न कराने को लेकर जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। ऐसी सीटों पर मुस्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं। इन सीटों पर होने वाली वोटिंग की रफ्तार काफी कुछ बयां कर देगी। मुस्लिम बहुल क्षेत्र जोकीहाट में भी मुकाबला काफी दिलचस्प है। इस सीट पर AIMIM-जेडीयू उम्मीदवारों के बीच टक्कर है। इसके अलावा अररिया, बहादुरगंज, अमौर, बायसी, कोचाधामन और बलरामपुर सीट पर भी मुस्लिम बहुल सीटें हैं, जिन पर सबकी नजर बनी हुई है।
कोचाधामन विधानसभा सीट: कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र में 70 फीसदी से अधिक मुस्लिम वोटर्स हैं। कोचाधामन के वर्तमान विधायक मुहम्मद इजहार असफी हैं, जो 2020 के चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के टिकट पर जीते थे। अररिया विधानसभा सीट
अररिया विधानसभा भी मुस्लिम बहुत सीट है, जहां से इस बार भी दो मुस्लिम उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होती नजर आ रही है। अररिया सीट पर पिछले चुनाव में कांग्रेस के आबिदुर रहमान ने जेडीयू की शगुफ्ता अजीम को हराया था। इस हार को जीत में बदलने के लिए शगुफ्ता अजीम को वोटों की दूरी खत्म होगी, क्योंकि पिछली बार दोनों के बीच 48 हजार वोटों का अंतर था।अमौर विधानसभा सीट: पूर्णिया का अमौर विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल है। यहां करीब 70 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। इस सीट पर 2020 के विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने जीत दर्ज की थी। अमौर से विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान के सामने इस बार जेडीयू के सबा जफर और कांग्रेस के जलील मस्तान से हैं।मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां धार्मिक धुव्रीकरण नहीं पाता है।जोकीहाट विधानसभा सीट: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने पिछले विधानसभा में इस सीट से जीत दर्ज की थी. जोकीहाट में एआईएमआईएम के शाहनवाज आलम ने राजद के सरफराज आलम को 2020 चुनाव में हराया था. लेकिन बाद में शाहनवाज ने राजद का दामन थाम लिया था. इस बार राजद ने शाहनवाज आलम को ही इस सीट से मैदान में उतारा है. जेडीयू ने इस सीट पर मंजर आलम को चुनाव मैदान में उतारा है.
बहादुरगंज विधानसभा सीट: किशनगंज जिले की बहादुरगंज विधानसभा सीट, जो कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र मानी जाती है, इस बार भी राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम है. इस सीट पर 2020 में मोहम्मद अंजार नईमी ने एआईएमआईएम के टिकट पर जीता. लेकिन नईमी ने बाद में राजद का दामन थाम लिया. इस बार एआईएमआईएम ने मोहम्मद तौसीफ आलम को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने मोहम्मद मसवर आलम और एनडीए की ओर से एलजेपी (R) के मोहम्मद कलीमुद्दीन को मैदान में उतारा गया हैं।बायसी विधानसभा सीट: बायसी विधानसभा सीट से आरजेडी ने अपने मौजूदा विधायक सैयद रुकनुद्दीन अहमद का टिकट काट दिया है. पार्टी ने यहां से पूर्व विधायक अब्दुस सुभान को उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी ने पूर्व विधायक विनोद यादव, जबकि AIMIM ने गुलाम सरकार को उम्मीदवार बनाया है। बलरामपुर विधानसभा सीट बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 60.80 फीसद मुस्लिम मतदाता हैं. यहां से 2020 में CPI(ML)(L) के महबूब आलम ने 104,489 वोट (51.11%) प्राप्त करते हुए VIP के वरुण कुमार झा को 53,597 मतों के भारी अंतर से हराया।विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के लिए ये चरण सत्ता में लौटने का एक तरह से परीक्षण है, जहां उन्हें अपने पिछले कार्यकाल के अनुभवों और विकास कार्यों के आधार पर जनता का भरोसा दोबारा जीतना होगा. दूसरी ओर, तेजस्वी यादव के लिए ये मौका है युवा नेतृत्व को स्थापित करने का. जनता के सामने ये स्पष्ट विकल्प है, पुराने और अनुभवी नेतृत्व पर कायम रहना या नई उम्मीद के तौर पर उभर रहे युवा नेता को मौका देना.बिहार चुनाव का दूसरा चरण सत्ता का दरवाजा साबित हो सकता है. 2020 के चुनाव में एनडीए के प्रमुख घटक भाजपा ने 42 और जदयू ने 20 सीटें जीती थीं, जबकि महागठबंधन की ओर से राजद को 33 और कांग्रेस को 11 सीटों पर जीत मिली थी.
इस बार, जिन सीटों पर जीत का फासला कम था, वे सबसे बड़ी चुनौती पेश कर रही हैं. राजनीति के जानकारों के मुताबिक, इस चरण के परिणाम से ये लगभग तय हो जाएगा कि बिहार में सत्ता किसकी ओर झुकेगी. पहले चरण में मतदाताओं की बड़ी संख्या में भागीदारी ने मुकाबले को और भी रोमांचक बना दिया है.दूसरे चरण में महागठबंधन की सबसे बड़ी घटक पार्टी राजद ने सबसे ज्यादा 71 उम्मीदवार उतारे हैं. इसके बाद भाजपा के 53 और जदयू के 44 उम्मीदवार मैदान में हैं. कल की एक खास बात महिला प्रतिनिधित्व का मजबूत होना है. महागठबंधन की 15 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि एनडीए के 25 महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ रही हैं. ये आंकड़ा बिहार चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सेकंड फेज सिर्फ वोटिंग डेट नहीं, बल्कि सत्ता की दिशा तय करने वाला निर्णायक रण है. 20 जिलों की 122 सीटों पर होने वाला ये मुकाबला न सिर्फ नीतीश कुमार की सियासी साख की परीक्षा है, बल्कि बिहार की जनता के मूड को भी साफ-साफ दिखाएगा कि राज्य पुराने अनुभव पर भरोसा रखेगा या नई उम्मीद के तौर पर उभर रहे तेजस्वी यादव को मौका देगा.
ये चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछली बार 2020 में इन्हीं 122 सीटों पर एनडीए ने 66 और महागठबंधन ने 49 सीटें जीती थीं. दोनों गठबंधनों की पूरी रणनीति इन इलाकों पर केंद्रित है. वैसे कल दूसरा चरण चुनावी भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है. तीन दर्जन सीटों पर बेहद कम अंतर से हुई पिछली जीत-हार ने इस बार मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है.बिहार चुनाव के दूसरे चरण में सीमांचल एक बार फिर सियासत का केंद्र बन गया है.यहां मुस्लिम वोटों में बिखराव का असर निर्णायक हो सकता है. सुरजापुरी और शेरशाहवादी मुसलमानों के अलग-अलग रुझान ने समीकरण उलझा दिए हैं. ओवैसी, प्रशांत किशोर और महागठबंधन सभी इस वर्ग को साधने में जुटे हैं, जबकि एनडीए इसे अवसर मान रहा है. 6 नवम्बर को बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया है. अब 11 नवंबर को दूसरे चरण की वोटिंग होगी. फर्स्ट फेज में 65.08% मतदान हुआ है. ऐसे में सेकंड फेज में भी बंपर वोटिंग की उम्मीद जताई जा रही है. दूसरे चरण में सीमांचल की 24 सीटों पर भी मतदान होगा. जो बेहद अहम होने वाला है. सीमांचल की 24 सीटें बिहार की नई सरकार तय करेगी. लेकिन इस बार सियासी समीकरण बदले हुए हैं.
प्रशांत किशोर की जन सुराज की एंट्री से यहां मुकाबला चौतरफा हो गया है. एक तरफ बीजेपी-जेडीयू वाला एनडीए है, दूसरी तरफ आरजेडी-कांग्रेस वाला महागठबंधन है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी सीमांचल की 15 सीटों पर लड़ रही है. वहीं जन सुराज सभी सीटों पर चुनावी मैदान में है.गौरतलब हो कि 2020 के चुनाव में सीमांचल की 24 सीटों में एनडीए को 12, महागठबंधन को 7, और ओवैसी की एआईएमआईएम को 5 सीटें मिली थीं. लेकिन बाद में एआईएमआईएम के 4 विधायक राजद में शामिल हो गए थे. मुस्लिम बाहुल्य वाली इन सीटों पर एनडीए और एमजीबी के लिए चुनौती कड़ी है. सीमांचल की 24 सीटों का गणित पूर्णिया और कटिहार की 7-7 अररिया की 6 और किशनगंज की 4 सीटों पर टिकी हुई है.अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कल के 20 जिले के 122 विधानसभा के मतदाताओं आखिर किस पार्टी को 122 के जादुई आंकड़े तक पहुंचाने में मदद करते हैं.यह तो शुक्रवार यानी 14 नवंबर को ही पता चल पायेगा. अनुभवी नीतीश कुमार, युवा तेजस्वी यादव या पीके के जनसुराज पार्टी बिहार प्रदेश में अगले पांच सालों तक बिहार प्रदेश के रहनुमा बनेंगे।









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