अशोक झा / सिलीगुड़ी: सिलिगुड़ी भाजपा विधायक विकास कोष के पैसे खर्च करने के मामले में शासक दल तृणमूल कांग्रेस द्वारा जो बाधाएँ खड़ी की जा रही हैं, उसके खिलाफ़ विरोध जताने हेतु शीतकालीन अधिवेशन में माननीय विपक्ष के नेता की अनुमति के बाद यदि मुझे धरने पर बैठने या आवश्यकता पड़ने पर अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होना पड़ेगा तो हम बैठेंगे।
हालांकि भाजपा विधायक के आरोप को लेकर मेयर ने कहा कि
चुनाव आ रहा है इसलिए वह नौटंकी कर रहे है। भाजपा विधायक शंकर घोष ने कहा शहर में ऐसी बातें हो रही हैं कि सिलिगुड़ी के वरिष्ठ राजनेता तथा मेयर साहब इस बार विधानसभा चुनाव में शासक दल के प्रत्याशी के रूप में सिलिगुड़ी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार होंगे।इसलिए ,तृणमूल कांग्रेस की परंपरागत राजनीति के तहत, क्षेत्र के सभी कार्यक्रमों से सिलिगुड़ी विधायक को बाहर रखने के लिए पर्दे के पीछे से परोक्ष धमकी, डर दिखाना और निम्न स्तरीय राजनीतिक आचरण ,आज इस हद तक पहुँच चुका है कि जहाँ भी विधायक विकास कोष से SJDA या सिलिगुड़ी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधीन किसी ठेकेदार द्वारा काम शुरू किया जाता है, तो वहाँ तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के द्वारा ठेकेदारों को धमकाकर काम स्थगित करवा दिया जाता है,या फिर जहाँ विधायक विकास कोष या अन्य स्रोतों से पैसा आता है, उसे रोककर कहा जा रहा है कि काम तो सिलिगुड़ी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ही करेगी और इस तरह उस पर सिलीगुड़ी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का मुहर (स्टिकर) लगा दिया जा रहा है।खाटू श्याम जी मंदिर के समीप सड़क, उदयन समिति क्लब की फेंसिंग, वार्ड नंबर 3 का हाई मास्क लाइट
वार्ड नंबर 18 और 28 के महिलाओं के स्नानागार, सहित ऐसे अनेकों उदाहरण मौजूद हैं। आज भी सिलिगुड़ी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के लिए काम कर रहे ठेकेदारों के करोड़ों रुपये बकाया हैं, शहर का विकास ठप्प पड़ा है। ऐसे में सिलिगुड़ी विधायक के इस न्यूनतम विकास कोष के कामों को रोक देना। यह वरिष्ठ राजनेता तथा सिलिगुड़ी के वर्तमान मेयर साहब द्वारा कैसी राजनीतिक संस्कृति का परिचय दिया जा रहा है ?*चोर–चोर मौसेरे भाई* आजकल सिलिगुड़ी शहर में यह विषय अत्यंत चर्चित है। इससे भी बड़ा मुद्दा यह है ,कि शासक दल के ही एक लंबे अनुभव वाले वरिष्ठ राजनेता ने यह प्रश्न उठाया है कि इससे पहले कोई मेयर ,बिल्डिंग विभाग और PWD विभाग को अपने अधीन क्यों नहीं रखते थे?वर्तमान मेयर ने ही क्यों रखा है?इस सवाल का जवाब कौन देगा? एक ओर अवैध निर्माणों को लेकर वित्तीय लेन-देन के आरोप, दूसरी ओर आय से अधिक संपत्ति, दोनों हाथों से पैसे खर्च करना, ऐश्वर्य पूर्ण जीवनशैली!क्या इनमें कोई संबंध है? इन पैसों का स्रोत क्या है? जिनके पास कभी 500 और 1000 रुपये भी नहीं होते थे, आज वे जनप्रतिनिधि बनने के बाद करोड़ों की संपत्ति के मालिक कैसे बन गए?साधारण जनता इन सवालों का जवाब कौन देगा ?”राजनीति यानी व्यवसाय” यह संदेश समाज के सामने ऐसे हीं नेताओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।शहर के विकास की जगह स्वयं का निजी विकास रॉकेट की गति से हुआ है।दुर्भाग्य है, कि सिलिगुड़ी शहर आज इसकी कीमत चुका रहा है।आने वाले समय में सिलिगुड़ी के लोग निश्चित रूप से इसका निर्णय करेंगे।









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