अशोक झा/ सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर दूसरे राज्यों में बंगालियों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया।।विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह भाजपा को एक इंच भी जमीन नहीं देंगी। उन्होंने जलपाईगुड़ी में साफ कहा कि बंगाली लोग ही बंगाल चलाएंगे, दिल्ली के लोग नहीं। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर दूसरे राज्यों में बंगालियों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह भाजपा को एक इंच भी जमीन नहीं देंगी। उन्होंने जलपाईगुड़ी में साफ कहा कि बंगाली लोग ही बंगाल चलाएंगे, दिल्ली के लोग नहीं। सीएम ममता बनर्जी ने 124 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। तृणमूल कांग्रेस बंगाली भावनाओं को चुनाव से पहले मुद्दा बना री है। सत्तारूढ़ दल ने पहले ही भाषा आंदोलन शुरू कर दिया है।।उन्होंने कहा, “हम पहले ही 24,000 प्रवासी मजदूर परिवारों को वापस ला चुके हैं। उन्हें स्वास्थ्य साथी कार्ड का लाभ मिलेगा। सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “जो श्रमिक बाहर जाते हैं उन्हें सिर्फ इसलिए उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है क्योंकि वे बंगाली में बोलते हैं, मैं कहती हूं, बंगाली में अधिक बोलें, और देखते हैं कि किसमें हिम्मत है और वे कितना उत्पीड़न कर सकते हैं।
बंगाली लोग ही बंगाल चलाएंगे… ममता की हुंकार
उन्होंने कहा कि असम से अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी और कूचबिहार के लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। हमारे लोगों को सिर्फ इसलिए बांग्लादेश की ओर धकेला जा रहा है, क्योंकि वे बंगाली में बोलते हैं. वे आदिवासी लड़कियों को भी नहीं बख्श रहे हैं… आप बंगाल को नियंत्रित नहीं कर सकते. बंगाली लोग बंगाल चलाएंगे, दिल्ली के लोग नहीं. ममता बनर्जी ने कहा, “आयुष्मान योजना में भेदभाव किया जाता है, लेकिन स्वास्थ्य साथी में कोई भेदभाव नहीं है. सभी को यह मिलता है.”उत्तर बंगाल का तीन-दिवसीय प्रशासनिक दौरा कर रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी संबंधी समस्याओं के कारण अपने ठहरने का बंदोबस्त ‘कन्याश्री’ बंगले के बजाय ‘उत्तरकन्या’ में स्थानांतरित करना पड़ा है। कन्याश्री बंगले में मोबाइल नेटवर्क की समस्या थी, जिसके चलते मुख्यमंत्री बनर्जी को नेपाल के घटनाक्रम से जुड़ी अद्यतन जानकारी मिल पाना मुश्किल हो गया था। नतीजतन, मुख्यमंत्री मंगलवार रात स्थिति पर करीब से नजर रखने के लिए ‘उत्तरकन्या’ चली गईं।









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