Close Menu
Roaming ExpressRoaming Express
    Latest News

    महाशिवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन का वास्तविक है दर्शन

    February 11, 2026

    बंगाल में TMC पार्षद ने 81 साल के बुजुर्ग की पीट-पीटकर की हत्या, गिरफ्तारी के बाद पार्टी से सस्पेंड

    February 9, 2026

    संत कबीर अकादमी सभागार में सजा रंगमंच

    February 9, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, February 11
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    Roaming ExpressRoaming Express
    • होम
    • बस्ती
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राजनीति
    • बिज़नेस
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • जॉब-करियर
    • धर्म एवं आस्था
    • संपादकीय
    Roaming ExpressRoaming Express
    • होम
    • बस्ती
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • राजनीति
    • बिज़नेस
    • क्राइम
    • खेल
    • मनोरंजन
    • जॉब-करियर
    • धर्म एवं आस्था
    • संपादकीय
    Home » एक कट्टर मुसलमान और कट्टर राष्ट्रवादी आज़ाद ने लंबे समय से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को किया था खारिज

    एक कट्टर मुसलमान और कट्टर राष्ट्रवादी आज़ाद ने लंबे समय से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को किया था खारिज

    विभाजन और सांप्रदायिक अलगाववाद को शुरू से नकारा है संविधान निर्माण के मुस्लिम विद्वानों ने
    Roaming ExpressBy Roaming ExpressSeptember 17, 2025 राष्ट्रीय

    अशोक झा/ सिलीगुड़ी: वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम फैसला को लेकर एक बार फिर चुनाव पूर्व सीमांचल की फिजा में गर्माहट आ रही है। कुछ राष्ट्रविरोधी ताकत इसके आड़ में अलगाव की बात करने लगे है। सुप्रीम कोर्ट ने नए वक्फ कानून की तीन धाराओं पर रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून के उस प्रावधान पर रोक लगा दी जिसके अनुसार वक्फ बोर्ड में तीन से ज्यादा गैर मुस्लिम सदस्यों को नहीं लेना है। सर्वोच्च अदालत ने वक्फ अधिनियम के अनुच्छेद 3(74) पर रोक लगा दी है। मुस्लिम किसे माना जाएगा?: सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम के उस प्रावधान पर भी रोक लगा दी है जिसके अनुसार केवल पाँच साल या उससे अधिक समय तक मुस्लिम रहा व्यक्ति ही वक्फ बोर्ड को अपनी सम्पत्ति दान दे सकता है। वक्फ कानून के इस प्रावधन पर भी सुप्रीम कोर्ट ने अभी के लिए रोक लगा दी है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि पहले सभी राज्यों को अपने स्तर पर नियम बनाने की जरूरत है जिससे यह तय हो सके कि किसे मुस्लिम माना जा रहा है या नहीं।
    इसके अलावा धारा 3(74) से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड के प्रावधान पर भी फिलहाल रोक रहने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा है कि कार्यपालिका किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का निर्धारण नहीं कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ सम्पत्तियों को रजिस्टर करवाने के प्रावधान को उचित ठहराया है। अदालत ने कहा कि पहले वाले कानून में भी यह प्रावधान था।।सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा है कि कोशिश रहनी चाहिए कि बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मुस्लिम ही हो। अदालत ने यह भी कहा है कि उनका यह आदेश इस एक्ट की वैधता पर उसकी अंतिम राय नहीं है। अब बहस हो रही है कि भारतीय संविधान का निर्माण केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह विविध समुदायों के बीच एक नैतिक अनुबंध था, जो उपनिवेशवाद की साझा पीड़ा और एक संप्रभु, समावेशी राष्ट्र के साझा स्वप्न से जुड़ा था। ऐसे समय में जब उपमहाद्वीप विभाजन और एकता के चौराहे पर खड़ा था, कई मुस्लिम नेताओं ने सांप्रदायिक अलगाव के बजाय संवैधानिक लोकतंत्र का मार्ग चुना। संविधान सभा में बैठे इन दूरदर्शी लोगों ने धर्मनिरपेक्षता, न्याय और समान अधिकारों को प्रतिष्ठित करने वाले एक कानूनी ढाँचे को आकार देने में मदद की। निष्क्रिय भागीदार होने से कहीं आगे, वे एक आधुनिक, बहुलतावादी भारत के सक्रिय निर्माता थे। उनका योगदान हमें याद दिलाता है कि भारत की अवधारणा कभी किसी एक धर्म या विचारधारा से नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और एकता के लिए प्रतिबद्ध विचारों के एक गठबंधन से बनी थी। इन दूरदर्शी लोगों में सबसे प्रमुख थे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, जो एक विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे। संविधान सभा में उनकी उपस्थिति प्रतीकात्मक और महत्वपूर्ण दोनों थी। एक कट्टर मुसलमान और कट्टर राष्ट्रवादी, आज़ाद ने लंबे समय से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को खारिज किया था। अपने भाषणों में, उन्होंने दोहराया कि भारत का भाग्य धार्मिक अलगाव पर नहीं, बल्कि साझा इतिहास, पारस्परिक सम्मान और एक साझा भविष्य पर आधारित हो सकता है। आज़ाद की बौद्धिक गंभीरता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता ने संविधान के कई प्रमुख प्रावधानों को प्रभावित किया। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देने वाले अनुच्छेद 25 और शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन के अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने वाले अनुच्छेद 30 का पुरजोर समर्थन किया। ये केवल संवैधानिक धाराओं से कहीं अधिक, विशेष रूप से उन मुसलमानों के लिए नैतिक आश्वासन थे जिन्होंने विभाजन के बाद भारत में रहने का विकल्प चुना था।
    भारतीय संविधान के निर्माण में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, सर मुहम्मद सादुल्ला और बेगम रसूल जैसे मुस्लिम दूरदर्शी नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने एक धर्मनिरपेक्ष और समावेशी राष्ट्र के विचार का समर्थन किया, धार्मिक सहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को बढ़ावा दिया। वे संविधान को एक ऐसे जीवंत लोकतंत्र के रूप में देखते थे जो सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, चाहे उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। प्रमुख मुस्लिम नेता और उनका योगदान:मौलाना अबुल कलाम आज़ाद: संविधान निर्माण में एक प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में, उन्होंने एक धर्मनिरपेक्ष राज्य का समर्थन किया, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता और समानता को बढ़ावा मिला। सर मुहम्मद सादुल्ला: समावेशिता के प्रणेता के रूप में, उनकी आवाज़ ने संविधान में धार्मिक सहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के सिद्धांतों को स्थापित करने में मदद की, जिससे अनुच्छेद 25 से 29 तक धर्म और अंतःकरण की स्वतंत्रता की गारंटी मिली। बेगम रसूल: वह संविधान सभा की एकमात्र मुस्लिम महिला थीं, जिन्होंने एक समावेशी भारत के विचार को आगे बढ़ाया। तजामुल हुसैन: वह एक और मुस्लिम नेता थे जिन्होंने संविधान निर्माण में सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाई। आज़ाद ने भारत की शिक्षा नीति को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा मंत्री के रूप में, उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) की नींव रखी और सभी जातियों व समुदायों में वैज्ञानिक सोच और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनके लिए, किसी राष्ट्र की प्रगति केवल संवैधानिक आदर्शों पर नहीं, बल्कि प्रबुद्ध नागरिकों पर निर्भर करती है। उन्होंने एक बार कहा था, “दिल से दी गई शिक्षा समाज में क्रांति ला सकती है।” संविधान सभा में एक और महत्वपूर्ण मुस्लिम हस्ती बेगम ऐज़ाज़ रसूल थीं, जो इस ऐतिहासिक संस्था का हिस्सा बनने वाली एकमात्र मुस्लिम महिला थीं। उनकी उपस्थिति ने ही रूढ़िवादिता को चुनौती दी और एक गहरे पितृसत्तात्मक समाज में मौजूद बाधाओं को तोड़ा। बेगम रसूल लैंगिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की प्रबल समर्थक थीं। उनकी आवाज़ ने एक एकीकृत चुनाव प्रणाली बनाने के संकल्प को मज़बूत किया, जो आज भी भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रीढ़ बनी हुई है। असम के पूर्व प्रधानमंत्री सैयद मोहम्मद सादुल्लाह एक अन्य प्रमुख व्यक्ति थे जिनकी अंतर्दृष्टि ने संघीय और अल्पसंख्यक हितों के बीच संतुलन बनाने में मदद की। नागरिकता और अल्पसंख्यक सुरक्षा उपायों पर बहस में उनके हस्तक्षेप ने भारत के बहुलवादी स्वरूप की परिपक्व समझ को प्रतिबिंबित किया। उन्होंने कानूनी समानता और सामाजिक समरसता पर ज़ोर दिया, विशेषाधिकारों की नहीं, बल्कि ऐसे संरक्षण की वकालत की जिससे हर भारतीय, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, फल-फूल सके। ये मुस्लिम नेता अलग-थलग आवाज़ें नहीं थीं। वे मुस्लिम देशभक्ति के उस व्यापक परिवेश का हिस्सा थे जो इस विचार को खारिज करता था कि धर्म राष्ट्रीय निष्ठा का निर्धारण करे। आज़ादी से पहले और बाद के वर्षों में, जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे संगठनों और खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे व्यक्तियों (हालांकि संविधान सभा में नहीं) ने भारत की एकता और संवैधानिक मूल्यों का पूर्ण समर्थन किया।

    Post Views: 77

    Related Posts

    संत कबीर अकादमी सभागार में सजा रंगमंच

    February 9, 2026By Roaming Express

    बंगाल में अपने विधायक के खिलाफ प्रस्ताव से गुस्से में BJP, असेंबली से किया वॉक आउट; कहा- ममता सरकार की मनमानी

    February 7, 2026By Roaming Express

    केंद्रीय बजट 2026-27 देश को विकसित भारत की दिशा में ले जाने वाला ऐतिहासिक बजट : नित्यानंद राय

    February 7, 2026By Roaming Express

    गृहमंत्री अमित शाह का बंगाल दौरा 17 फरवरी से, करेंगे कई अहम बैठक

    February 6, 2026By Roaming Express

    यूपी में रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना’ के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गठन हेतु विशेषज्ञ समितियां गठित

    February 6, 2026By Roaming Express

    सरकार गठन के साथ मणिपुर में भड़की हिंसा, सुरक्षा बलों से टकराव

    February 6, 2026By Roaming Express
    आज का मौषम
    मौसम
    Top Posts

    महाशिवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन का वास्तविक है दर्शन

    February 11, 2026

    यूपी: प्रदेश में मौसम ने ली करवट, 11 सितंबर तक धूप और उमस करेगी परेशान, कई नदियां बाढ़ से उफान पर

    September 7, 2025

    यूपी: प्रदेश में मौसम ने ली करवट, 11 सितंबर तक धूप और उमस करेगी परेशान, कई नदियां बाढ़ से उफान पर

    September 7, 2025
    Don't Miss

    महाशिवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन का वास्तविक है दर्शन

    February 11, 2026

    – राजयोग से समृद्धि व मोक्ष का महापर्व है महाशिवरात्रि अशोक झा/ सिलीगुड़ी: महाशिवरात्रि…

    बंगाल में TMC पार्षद ने 81 साल के बुजुर्ग की पीट-पीटकर की हत्या, गिरफ्तारी के बाद पार्टी से सस्पेंड

    February 9, 2026

    संत कबीर अकादमी सभागार में सजा रंगमंच

    February 9, 2026

    12 नंबर बटालियन में प्रशिक्षण के दौरान एक सिविक वॉलंटियर की मौत को लेकर हंगामा

    February 9, 2026
    LATEST NEWS

    महाशिवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन का वास्तविक है दर्शन

    February 11, 2026

    बंगाल में TMC पार्षद ने 81 साल के बुजुर्ग की पीट-पीटकर की हत्या, गिरफ्तारी के बाद पार्टी से सस्पेंड

    February 9, 2026

    संत कबीर अकादमी सभागार में सजा रंगमंच

    February 9, 2026
    LANGUAGE
    OUR VISITORS
    1533469
    Hits Today : 1670
    Who's Online : 10
    CONTACT US

    CHIEF EDITOR
    Ramesh Mishra

    ADDRESS
    Shiv Nagar, Turkahiya, Gandhi Nagar, Basti, Uttar Pradesh – 272001

    MOBILE NO.
    +91 7985035292

    EMAIL roamingexpressbst@gmail.com

    WEBSITE
     www.roamingexpress.com

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.