कांशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के शोध छात्र श्री सुवास शर्मा को शृंगेरी शंकराचार्य जी द्वारा व्याकरण शास्त्र में उनके विशिष्ट प्रदर्शन के लिए *स्वर्णांगुलीय पुरस्कार* से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें दक्षिणाम्नाय श्रीशारदा पीठम्,शृंगेरी, कर्नाटक द्वारा आयोजित त्रयोदश दिवसीय श्री महागणपति वाक्यार्थ सभा के समापन समारोह के अवसर पर दिनांक 8-9-25 को उनके उत्कृष्ट शास्त्रार्थ प्रस्तुति के लिए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री विधु शेखर जी महाराज द्वारा दिया गया । शृंगेरी के तत्कालीन पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री सच्चिदानंद अभिनव भारती द्वारा आज से लगभग 140 वर्ष पूर्व प्रारंभ की गई इस सभा में देश के विभिन्न भागों से न्याय व्याकरण वेदांत मीमांसा आदि शास्त्रों के के उद्भट विद्वान सम्मिलित होते हैं तथा गूढ़ विषयों पर जगद्गुरु शंकराचार्य जी के समक्ष शास्त्रार्थ प्रस्तुत करते हैं। शंकराचार्य जी के अलावा उपस्थित विद्वानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समुचित समाधान देते हुए प्रस्तोता विद्वान अपने शास्त्रार्थ को पूर्ण करते हैं। इस सभा की एक और विशेषता है कि इसमें वक्ता को किसी प्रकार के पुस्तक अथवा पेपर के सहयोग की अनुमति नहीं होती, संपूर्ण प्रस्तुति स्मरण शक्ति के आधार पर होती है।
शोध छात्र सुवास शर्मा ने व्याकरण के अत्यंत दुरूह विशेष पर लगभग 1-30 घंटे तक शास्त्रार्थ करके विद्वानों को प्रभावित किया। उन्हें सम्मान स्वरूप शारदा पीठ की मुद्रा से अंकित सोने की अंगूठी, शाल एवं नगद राशि प्रदान की।
संकाय प्रमुख *प्रो राजाराम शुक्ल* ने कहा कि शोध छात्र सुवास शर्मा व्याकरण शास्त्र के गंभीर अध्येता हैं। संकाय द्वारा संचालित होने वाली मासिक शास्त्रार्थ सभा के संयोजन में उनकी अहम भूमिका रहती है। शृंगेरी शंकराचार्य द्वारा सम्मानित किया जाना वास्तव में गौरव का विषय है, संकाय परिवार इससे स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है ।
सुवास इस उपलब्धि पर संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के समस्त छात्रों एवं अध्यापकों ने प्रसन्नता व्यक्त की।








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