अशोक झा/ कोलकाता: बिहार गोपालगंज के कुख्यात अपराधी सुरेश यादव की कोलकाता के हावड़ा में सरेआम गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। ये खबर आज तड़के जैसे ही लोगों को मिली बंगाल से बिहार तक में हड़कंप मच गया हर कोई हैरान रह गया। सूत्रों के अनुसार, सुरेश यादव लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय था और उसके नाम पर कई गंभीर मामलों की जानकारी है। वह सिर्फ बिहार में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी अपने नेटवर्क के लिए जाना जाता था। इस हत्या ने अब उसके आपराधिक नेटवर्क और उसके व्यापक प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद हावड़ा पुलिस ने तुरंत क्षेत्र को सील कर दिया और जांच में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच के दौरान कई सुराग हाथ लगे हैं, और इस वारदात के पीछे किसी संगठित अपराध गिरोह का हाथ होने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, मृतक सुरेश यादव गोपालगंज के नगर थाना क्षेत्र के कुकुरभुक्का गांव का निवासी था और वह दो दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित था। स्थानीय लोगों ने बताया कि सुरेश रात करीब साढ़े नौ बजे बनबिहारी बसु लेन के संध्या बाजार इलाके से गुजर रहे थे। उसी समय अचानक बाइक सवार युवकों का एक समूह आया और उनपर कई राउंड फायरिंग की और इलाके से भाग गए। सुरेश मौके पर ही गिर पड़े। सूचना मिलते ही हावड़ा पुलिस मौके पर पहुंची। सुरेश को गंभीर हालत में हावड़ा जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज को भी खंगालना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरेश यादव जैसी कुख्यात शख्सियत की हत्या एक संगठनात्मक संदेश भी हो सकती है। इसके पीछे राज्य या राज्यों के अपराध जगत में प्रतिस्पर्धा, वर्चस्व की लड़ाई या व्यक्तिगत दुश्मनी जैसी वजहें हो सकती हैं। इसके अलावा, यह घटना दोनों राज्यों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चुनौती बन सकती है क्योंकि इसके प्रभाव का दायरा सीमाओं के पार फैला हुआ है।
स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों में इस घटना के बाद डर का माहौल है। संध्या बाजार में रोज़मर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और कई लोग सुरक्षा की दृष्टि से घरों में रहने लगे हैं। वहीं, बिहार और पश्चिम बंगाल के पुलिस विभागों ने इस हत्या को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त जांच की संभावना भी जताई है। सुरेश यादव का अपराध इतिहास लंबा और जटिल रहा है। उसके खिलाफ कई राज्यों में केस दर्ज हैं, और वह कई सालों से पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। उसकी हत्याकांड ने अब यह सवाल भी खड़ा किया है कि इतने बड़े अपराधी को राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों की नजर में रहते हुए भी इतनी आसानी से निशाना कैसे बनाया गया। अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना का प्रभाव केवल गोपालगंज या हावड़ा तक सीमित नहीं रहेगा। इससे क्षेत्रीय अपराधियों के बीच नई रणनीतियां और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। साथ ही, यह घटना मीडिया और जनता के बीच सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के सवालों को भी उजागर कर रही है।
जांच अधिकारी अब इस हत्या की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए लगे हुए हैं। सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और सुरेश यादव के आपराधिक नेटवर्क की छानबीन के आधार पर जल्द ही घटना के पीछे के असली कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इस हत्या ने साबित कर दिया है कि अपराध जगत में वर्चस्व और सत्ता की लड़ाई कितनी घातक और अप्रत्याशित हो सकती है। सुरेश यादव की मौत न केवल अपराध जगत के लिए बल्कि सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता के लिए भी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।सुरेश यादव के ऊपर गोपालगंज सहित बिहार के कई थानों में दो दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।बताया जाता है कि वर्तमान में वह गोपालगंज में भूमाफियाओं के साथ मिलकर जमीन पर कब्जा करने का भी काम करता था। अंधाधुंध फायरिंग में सुरेश यादव की मौके पर मौत
जानकारी के मुताबिक बीती रात हावड़ा के संध्या बाजार में बाइक सवार अपराधियों ने सुरेश यादव के ऊपर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक उसका हावड़ा इलाके में फ्लैट है, जहां वो अपने परिवार के साथ दशहरा मनाने गया था, लेकिन दशहरा से पहले ही उसकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। हालांकि सुरेश यादव के ऊपर इसके पहले भी गोपालगंज में ही दो-दो बार जानलेवा हमला हुआ था। इस दौरान उसे गोली भी लगी थी, लेकिन वो दोनों बार जिंदा बच गया। सुरेश यादव उर्फ सुरेश चौधरी गोपालगंज के नगर थाना क्षेत्र के कुकुरभुक्का गांव का रहने वाला था।
सुरेश यादव पर 24 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं
पुलिस सूत्रों के मुताबिक उसके ऊपर तत्कालीन समता पार्टी के नेता गिरीश सिंह समेत ट्रिपल मर्डर, तिरविरवा पंचायत मुखिया अमरजीत यादव की हत्या का भी आरोप है। साथ ही 1995 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मुन्ना सिंह की हत्या, सीवान के अपराधी राका तिवारी की हत्या सहित करीब 24 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। गोपालगंज एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस हत्या से जुड़े मामले की जांच के लिए गोपालगंज पुलिस से संपर्क किया है। सुरेश यादव की क्राइम डिटेल्स मांगी गई है, ताकि हत्या की गुत्थी सुलझाई जा सके। बंगाल पुलिस के मुताबिक सुरेश चौधरी की किन-किन लोगों से दुश्मनी था.।वह पूर्व में किसके टारगेट पर था। इन तमाम पहलुओं पर गोपालगंज पुलिस से जानकारी ली जा रही है।










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