

अशोक झा
नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ प्रदर्शन में 20 लोगों की मौत हुई। सरकार ने बैन वापस लिया और प्रदर्शन खत्म करने को कहा, लेकिन युवाओं ने प्रदर्शन तेज करने का फैसला किया है। सिलीगुड़ी के पानीटंकी से सटे झापा जिला के बिर्ता मोड़ में सुबह से प्रदर्शन और आगजनी शुरू हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी को लेकर विरोध जता रहे है। नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर लगे बैन के खिलाफ हिंसा में 20 लोगों की मौत हो गई। शाम को कैबिनेट की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई, सरकार ने सोमवार देर रात बैन वापस लेने का ऐलान किया। सरकार ने युवाओं से प्रदर्शन वापस लेने की अपील भी की। हालांकि युवाओं का कहना है कि वे मंगलवार यानी आज से प्रदर्शन तेज करेंगे। नेपाली संसद भवन के बाहर मंगलवार सुबह धीरे-धीरे भीड़ जुट रही है। संसद भवन के बाहर तोड़फोड़, आगजनी और पत्थरबाजी के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। लोग प्रधानमंत्री केपी ओली को हटाने और दोबारा चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। साथ ही ‘केपी चोर… देश छोड़’ जैसे नारे भी लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि हमारा आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया को लेकर नहीं है। हमारी मांग है कि नेपाल में करप्शन खत्म हो।नेपाल पुलिस प्रवक्ता बिनोद घिमिरे ने बताया कि काठमांडू में झड़प में 18 और सुनसरी जिले में पुलिस फायरिंग में 2 लोगों की मौत हो गई। हिंसक प्रदर्शन पोखरा, बुटवल, भरतपुर, इटहरी और दमक तक फैल गए। नेपाल कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले गृहमंत्री रमेश लेखक ने घातक झड़पों के बाद नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया। नेपाली कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री ओली को यह इस्तीफा प्रधानमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट बैठक में शाम को सौंपा।
अस्पतालों में कम पड़ रही जगह: काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आठ लोगों की मौत नेशनल ट्रॉमा सेंटर में, तीन-तीन की मौत एवरेस्ट व सिविल अस्पताल में, दो की काठमांडू मेडिकल कॉलेज में और एक की त्रिभुवन टीचिंग हॉस्पिटल में हुई। कुल मिलाकर देशभर के अस्पतालों में 347 से ज्यादा घायलों का इलाज चल रहा है। कई बड़े अस्पतालों में जगह कम पड़ने लगी है और मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजा जा रहा है।
सरकार ने कहा- हमारा मकसद सिर्फ रेगुलेशन: हिंसा के बाद काठमांडू समेत कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया। ललितपुर, पोखरा, बुटवल और इटहरी तक पाबंदियां बढ़ा दी गईं. प्रशासन ने साफ किया कि ‘प्रतिबंधित इलाकों’ में किसी तरह का आंदोलन, धरना या भीड़ जुटाने की इजाजत नहीं होगी। नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया साइट्स (फेसबुक, व्हाट्सऐप, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत) बैन कर दी थीं क्योंकि उन्होंने तय समय सीमा में नेपाल सरकार के पास रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था. सरकार का दावा है कि यह कदम सिर्फ ‘रेगुलेशन’ के लिए था, लेकिन आम लोगों को आशंका है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला और सेंसरशिप बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ओली ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार हमेशा ‘अनियमितताओं और अहंकार का विरोध करेगी और किसी भी ऐसे कदम को स्वीकार नहीं करेगी जो राष्ट्र को कमजोर करता हो’। प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी सोशल मीडिया के खिलाफ नहीं है, ‘लेकिन जो स्वीकार्य नहीं है वह यह है कि कुछ लोग नेपाल में व्यापार करें, पैसा कमाएं और फिर भी कानून का पालन न करें’. इस कदम पर हो रही आलोचनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रदर्शनकारियों और विरोध की आवाजों को ‘कठपुतली बताया, जो सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध कर रहे हैं’। पत्रकारों ने किया विरोध: पत्रकारों ने काठमांडू में धरना दिया और बैन को मीडिया की आजादी पर हमला बताया. वहीं कंप्यूटर एसोसिएशन ऑफ नेपाल (CAN) ने कहा कि फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे अहम प्लेटफॉर्म्स को बंद करना शिक्षा, बिजनेस, कम्युनिकेशन और आम लोगों की जिंदगी पर गंभीर असर डालेगा। CAN अध्यक्ष सुनेना घिमिरे ने चेतावनी दी कि इससे नेपाल डिजिटल दुनिया से पिछड़ सकता है. इस बीच सोशल मीडिया पर ‘नेपो किड’ ट्रेंड भी वायरल हो गया है, जिसमें युवा नेताओं और रसूखदार लोगों के बच्चों पर भ्रष्टाचार से कमाई गई सुविधाओं का मजा लेने का आरोप लगा रहे हैं। आज से प्रदर्शन तेज करेंगे युवा: एक प्रदर्शनकारी ने सोमवार रात को कहा, ‘हम सुबह 9 बजे से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। यही विरोध प्रदर्शन का सबसे बड़ा कारण है। हम यहां घायलप्रदर्शनकारियों के इलाज में मदद कर रहे हैं। मंगलवार से विरोध प्रदर्शन और भी जोरदार हो जाएगा।एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘हम भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. नेताओं की जिंदगी और हमारी जिंदगी में बहुत फर्क है, जो गलत है। हमारा पैसा सही जगह नहीं जाता. देश के बड़े नेता और उनके लोग भ्रष्ट हैं। हमारा प्रधानमंत्री सबसे खराब है. छात्र बस भ्रष्टाचार बंद करने को कह रहे हैं, लेकिन उन्हें गोली मारी जा रही है। अगर पुलिस घुटनों के नीचे गोली मारे तो ठीक था, लेकिन वे सिर और छाती पर मार रहे हैं। काठमांडू में एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘मैंने खबरों में देखा कि कई लोग घायल हुए हैं, उन्हें गोली लगी है, इसलिए मैं ब्लड डोनेट करने चला आया। हमारा विरोध भ्रष्टाचार के खिलाफ है. हम इसके खिलाफ आवाज उठाने आए हैं। पीएम पर वादा पूरा न करने का आरोप: युवाओं ने प्रदर्शन में सोशल मीडिया बैन के अलावा बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के मुद्दे भी थे. युवा इन्हीं मुद्दों को लेकर सरकार को घेरना चाहते हैं. इन्होंने सोशल मीडिया पर Nepo Kid ट्रेंड भी चलाया। आरोप लगाया कि नेताओं के बच्चे भ्रष्टाचार की कमाई से ऐश कर रहे हैं और हम बेरोजगारी का शिकार हो रहे हैं. ओली सरकार पर करप्शन खत्म करने का वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।









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